
Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई हाई कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु के मंत्री आई. पेरियासामी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले को रद्द करने का आदेश दिया है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया गया था।
आई. पेरियासामी वर्ष 2006 से 2011 के बीच डीएमके सरकार में आवास मंत्री रहे हैं। उस दौरान राज्य सरकार द्वारा कई लोगों को फ्रीहोल्ड आधार पर घरों का आवंटन किया गया था। बाद में 2011 में एआईएडीएमके सरकार के कार्यकाल में इस आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया कि इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और कई लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
इसी आधार पर वर्ष 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत आई. पेरियासामी सहित कुल 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद मंत्री पेरियासामी ने इस मामले को रद्द करने की मांग करते हुए चेन्नई हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
मंगलवार को इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की बेंच के सामने हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुथु गणेश पांडियन ने अदालत में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि सरकारी नीतिगत निर्णय के तहत घरों का आवंटन करना किसी आपराधिक साजिश या वित्तीय नुकसान की श्रेणी में नहीं आता।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज मूल केस को पहले ही रद्द किया जा चुका है, इसलिए उसी आधार पर ईडी द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामला भी टिक नहीं सकता। दोनों मामलों में कोई ठोस आपराधिक आधार नहीं है।
सभी दलीलों और रिकॉर्ड की जांच के बाद अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज केस को रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद मंत्री आई. पेरियासामी को बड़ी राहत मिली है।
इस फैसले को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में था और इसमें कई स्तरों पर आरोप लगाए गए थे। अदालत के आदेश के बाद अब इस केस से जुड़े सभी कानूनी पहलू समाप्त हो गए हैं।





